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पीएसएलवी से पहले इनसे होता था प्रक्षेपण

Posted on Jul 18 2014 | Author: Site Admin

एसएलवी-3

उपग्रह प्रक्षेपण यान-3 (एसएलवी-3), भारत का पहला प्रायोगिक उपग्रह प्रक्षेपण यान था, जिसे 18 जुलाई 1980 को सफलतापूर्वक श्रीहरिकोटा से तब प्रक्षेपित किया गया, जब रोहिणी उपग्रह आरएस-1 को कक्षा में स्थापित किया गया था। एसएलवी-3, 22 मीटर ऊंचा, संपूर्णत: ठोस, 17 टन वजन का चार चरण का यान है, जो 40 किलोग्राम भारवाली श्रेणी के उपग्रहों को पृथ्वी की निम्न कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है। अगस्त 1979 में एसएलवी-3 की पहली प्रयोगात्मक उड़ान, केवल आंशिक रूप से सफल थी। जुलाई 1980 के प्रक्षेपणन के अलावा, मई 1981 और अप्रैल 1983 में कक्षीय रोहिणी उपग्रहों का प्रक्षेपण भी इससे किया गया।

एएसएलवी

संवर्धित उपग्रह प्रक्षेपण यान (एएसएलवी) कम लागत के मध्यवर्ती यान के रूप में कार्य करने हेतु विकसित किया गया। एएसएलवी कार्यक्रम के अंतर्गत चार उड़ानें आयोजित की गईं। पहली उड़ान 24 मार्च, 1987 को और दूसरी 13 जुलाई 1988 को संपन्न हुई। 20 मई, 1992 को एएसएलवी-डी3 को सफलतापूर्वक तब प्रक्षेपित किया गया, जब श्रोस-सी (106 किलोग्राम) को 255 & 430 किलोमीटर की कक्षा में स्थापित किया गया। 4 मई, 1994 को प्रक्षेपित एएसएलवी-डी4 ने 106 किलोग्राम वाले श्रोस-सी2 की परिक्रमा की। एएसएलवी ने उच्चतर विकास के लिए बहुमूल्य जानकारी प्रदान की।

सतीश धवन स्पेस सेंटर

सतीश धवन स्पेस सेंटर में उपग्रह प्रक्षेपित करने के लिए आवश्यक सुविधाएं मौजूद हैं। प्रक्षेपण कॉम्प्लेक्स ईंधन भरण, जांच और प्रक्षेपण की संपूर्ण सुविधा भी प्रदान करते हैं। इनके अतिरिक्त, यहां पृथ्वी के वायुमंडल के अध्ययन के लिए निर्मित रॉकेटों के प्रक्षेपण की सुविधाएं भी मौजूद हैं। प्रक्षेपण के लिए विशेष तौर पर दो पैड बनाए गए हैं।

प्रथम प्रक्षेपण पैड

पीएसएलवी या जीएसएलवी के प्रत्येक चरण और अंतरिक्ष यान को प्रक्षेपण पैड पर भेजने से पूर्व अलग-अलग सुविधाओं में तैयारी और इनकी जांच की जाती हैं। एक 76 मीटर ऊंचा मोबाइल सर्विस टॉवर (एमएसटी) यान के काम को आसान बनाता है। स्टील प्लेटों से निर्मित एक विस्तृत प्रक्षेपण मंच आधार के रूप में कार्य करता है। एमएसटी के अंदर संगठित एक स्वच्छ कक्ष में अंतरिक्ष यान को वाहन के साथ समेकित किया जाता है।

दूसरा प्रक्षेपण पैड

पीएसएलवी और जीएसएलवी के लिए अतिरिक्त प्रक्षेपण सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए सुविधाओं सहित एक अतिरिक्त प्रक्षेपण पैड बनाया गया है। इसे वर्तमान के पीएसएलवी और जीएसएलवी तथा भविष्य के प्रक्षेपण यान जैसे जीएसएलवी मार्क 3 दोनों के लिए बनाया गया है।

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