जयपुर। राजस्थान विधानसभा ने राजस्थान ऊंट (वध का प्रतिषेध और अस्थाई प्रवर्जन या निर्यात का विनियमन) विधेयक-2015 को पारित कर दिया है। राज्य में ऊंटों का वध और निर्यात रोकने वाला यह विधेयक सदन में चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित हो गया। पशुपालन मंत्री प्रभुलाल सैनी ने कहा कि पशु क्रूरता रोकने के लिए बने अनेक कानून होने के बावजूद सिर्फ ऊंट के लिए कानून नहीं था। इसलिए सरकार को यह बिल लाना पड़ा।
विधेयक के प्रमुख प्रावधानों के अनुसार राज्य में ऊंट का वध करना और इसके मांस को बेचना गैर कानूनी होगा। ऊंट को अन्य स्थान पर चराई के लिए ले जाने के लिए कलेक्टर से तय अवधि का परमिट लेना होगा। तय अवधि से अधिक समय होने पर ऊंट पालक के खिलाफ कार्यवाही। ऊंटों की संख्या में अंतर होने पर भी सजा का प्रावधान किया गया है। विधेयक में प्रावधान है कि किसी प्रकार के अपराध में एक से पांच साल की सजा तथा 20 हजार तक जुर्माना किया जा सकेगा। ऊंट को प्रताडि़त करने पर दो वर्ष की सजा व 3000 जुर्माना, ऊंट के दांत तोडऩे व अंग भंग पर तीन साल कैद व सात हजार जुर्माने का प्रावधान है। विधेयक के अनुसार शिकायत पर पालक को स्वयं को निर्दोष साबित करना होगा। विधेयक के अनुसार किसी भी मामले की जांच पर ऊंट जब्त कर लिया जाएगा और स्वैच्छिक एजेंसी को सौंपा जाएगा। (28 मार्च, 2015)

